Sunday, December 13, 2009

कैसे दूर होगी गरीबी और बेरोजगारी

गरीबी हटाने और रोजगार पैदा करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर हमारे पास सिर्फ और सिर्फ योजनाएं हैं। पिछले साल भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीबी निर्मूलन के लिए 151460 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। भारत के महालेखाकार (कैग)के अनुसार इसमें से ज्यादातर पैसा गैर सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा ये रुपया 8 अलग-अलग योजनाओं में बांट दिया गया मानों इस देश के लोगों की समस्याएं महज 8 प्रकार की हैं।

जब तक पैसा एक स्लम या एक गांव तक पहुंचे तब तक प्रशासनिक खर्च में ही बहुत सारा पैसा बर्बाद हो जाता है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक एक जिलें में शौचालय निर्माण के लिए आबंटित पैसा जिला प्रशासन की गाड़ियों, टेलीफोन और अन्य सुविधाओं पर खर्च कर दिया गया।

समाधान यही है कि पूरा पैसा सीधे गांव में भेज दिया जाए और लोग अपनी आवश्यकताओं के अनुरुप उन पैसों को खर्च करें। लोग खुद ये निर्णय लें कि पैसों को किस तरह खर्च करना है। हरेक गांव के भूखे और बेघर लोगों की एक सूची तैयार कर ली जाए। ऐसे लोगों की तत्काल मदद की जा सकती है। मुफ्रत बांटने के बजाए ऐसे लोगों पंचायत कार्य करवाए जा सकते हैं। इसके अलावा ग्राम सभा ऐसे लोगों को रोजगार उपलब्ध् कराने के लिए भी प्रयास कर सकती है। अगर ग्राम सभा को पर्याप्त फंड मिले तो ग्राम सभा लोगों को छोटे मोटे धंधे करने के लिए लघु कर्ज उपलब्ध् कराने का भी निर्णय ले सकती है।

ऊपर से आने वाली योजनाओं ने लोगों को भिखारी बना दिया है। गांव और स्लम में हरेक आदमी सरकार से कुछ मुफ्रत पाने की इच्छा रखने लगा है। इसे बदलना होगा। हरेक नागरिक को निर्णय प्रक्रिया, योजना निर्माण में हिस्सेदारी करनी होगी और अपने दायित्व का निर्वहन करना पड़ेगा।

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