Sunday, December 13, 2009

क्या है स्वराज?

ग्राम सभा और मोहल्ला सभा बनें सबसे ताकतवर
स्थानीय स्तर पर आम लोगों की सभा को सरकारी धन, काम और कार्यकारिणी पर पूरा अधिकार दिए जाने की जरुरत है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में ऐसा मंच दिए जाने की जरुरत है जहां लोग मिल बैठ कर सामूहिक रुप से निर्णय ले सकें और जो निर्णय स्थानीय अधिकारियों के लिए बाध्यकारी हो।

हमारी व्यवस्था में मजबूत केंद्र और राज्य सरकारें हैं, जो केंद्र और राज्य स्तर के मुद्दों से निपट सकती है। इसी प्रकार, स्थानीय स्वशासन की तरह स्थानीय मुद्दों पर काम करने के लिए ग्रामीण इलाकों में पंचायत और शहरी इलाकों में नगरपालिकाएं बनाई गई थीं लेकिन सत्ता में आने वाले दल इन संस्थाओं को अपने हिसाब से चलाने लगते है जिससे ये संस्थाएं अपने असली मकसद से भटक गई हैं।

उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में जहां पंचायतों की औसत जनसंख्या औसतन 15000 है, 2008 में कुल प्रति पंचायत 5 लाख रुपये से भी कम फंड मिला। अब भला इतने पैसों से कोई पंचायत क्या और कैसा विकास कर सकती है? इससे तो दो सड़कें भी नहीं बनाई जा सकतीं। एक तरफ तो स्थानीय स्तर पर काम करने के लिए पंचायतों को पैसा नहीं दिया जा रहा है वहीं केंद्र और राज्य सरकारें स्थानीय समस्याओं को भारी-भरकम योजनाओं के सहारे खत्म करने की कोशिश करती हैं। जाहिर है, इससे काम नहीं चल सकता। पूरे देश में, यहां तक कि राज्यों में भी इतनी अधिक भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विविध्ता है कि हर इलाके में लोगों की स्थानीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग अलग तरह की व्यवस्था की ज़रूरत है। शासन का एक ही स्वरुप सभी जगहों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। पंचायत और नगरपालिका को तत्काल प्रभावकारी स्थानीय स्वशासन संस्था के रूप में बदलने की ज़रूरत है। इससे लोग अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधन खुद कर सकेंगे, साथ ही राज्य और केंद्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज़ भी उठा सकेंगे। तब लोग इतने असहाय भी नहीं होंगे। हम इस बारे में आश्वस्त हैं कि नक्सलवाद सहित देश की बहुत सारी समस्याओं से निजात पाने का यही एकमात्र तरीका है।

सत्ता सीधे जनता के हाथ में हो
स्वशासन के लिए बनी किसी भी संस्था की सफलता के लिए पहली शर्त तो यही है कि उसमें सत्ता सीधे लोगों के हाथ में होनी चाहिए न कि चुने हुए कुछ लोगों के हाथ में।
सवाल यह उठता है कि क्या आम लोगों की सभा में फैसले लिए जा सकते है? जी हां! बिल्कुल लिए जा सकते हैं। बशर्ते कि इस तरह की बैठकें कराने के लिए कानून ठीक तरह से बनाए जाएं। स्विटज़रलैंड, ब्राज़ील और अमेरिका में आज स्थानीय लोग अपनी स्थानीय स्तर की व्यवस्था इसी तरह चलाते हैं। यहां तक कि प्राचीन भारत में इसी तरह की व्यवस्था रहती थी।

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